Saturday, May 27, 2023

डीपफ़ेक और AI का कमाल या हमारी सुरक्षा को खतरा ?

 



डीपफ़ेक और AI का कमाल या हमारी सुरक्षा को खतरा?


हो सकता है यह जानकारी आपको धोखा खाने से बचाये... लुटने से बचाये।


तकनीक जैसे जैसे आधुनिक होती जा रही है... उससे जुड़े खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं... इसको 2 सच्चे उदाहरणों से समझते हैं।


1. चीन में पिछले दिनों एक व्यक्ति को 5 करोड़ रूपए का चूना लग गया। हुआ यह था कि उसके पास एक वीडियो कॉल आई... वीडियो कॉल में उसका करीबी दोस्त था, जो काफी परेशानी में दिख रहा था। दोस्त ने स्वयं को बहुत बुरी हालत में दिखाया और आर्थिक मदद मांगी।


चूँकि दोस्त सामने दिख रहा था, बात कर रहा था, इस व्यक्ति का दिल पसीज गया... और फिर इसने अपने कथित दोस्त के दिए गए एकाउंट में पैसे ट्रान्सफर कर दिए।


बाद में पता लगा कि उस दोस्त ने कभी कॉल किया ही नहीं था... और इस व्यक्ति के साथ ठगी हो गई थी।


मामले की जांच पुलिस ने की... बैंक ट्रान्सफर ट्रेस किये गए, अधिकांश पैसा बरामद कर लिया गया है, अपराधी भी जल्दी पकड़ा जायेगा।


2. अमेरिका के एरिज़ोना में एक 15 साल की लड़की स्कीइंग कर गई थी... अचानक से उसकी माँ को एक कॉल आता है। कॉल की शुरुआत उस लड़की के रोने की आवाज़ से होती है... माँ घबरा जाती है और अपनी बेटी से प्रश्न पूछने की कोशिश करती है।


इतने में ही एक पुरुष की आवाज़ आती है... वह कहता है कि उस महिला की बेटी उसके कब्जे में है... और अगर एक मिलियन डॉलर ट्रांसफर नहीं किये तो वह उसकी बेटी को मार देगा। माँ गिड़गिड़ाई... कहा कि इतने पैसे नहीं हैं... अपहरण करने वाला 5 लाख डॉलर पर अड़ जाता है... माँ उससे थोड़ी मोहलत मांगती है... वो आदमी धमकी देता है कि अगर पुलिस को पता चला तो उसकी बेटी को मार देगा।


महिला अपनी एक दोस्त को फोन करती है, और उसे यह सब बताती है... वह दोस्त तुरंत उस ग्रुप को कॉल करती है जो स्कीइंग के लिए गया था, वहाँ पता लगता है कि उस लड़की का अपहरण नहीं हुआ था... वह तो वहाँ घूम रही थी और सुरक्षित थी।


तुरंत 911 पर कॉल किया गया और उन्हें इस बारे में बताया गया, कि उसकी बेटी की आवाज में उन्हें कॉल करके डराया गया और पैसे उगाहने की कोशिश की गई।


इन दोनों मामलों में आप देख सकते हैं कि कैसे एक दोस्त के चेहरे का इस्तेमाल किया गया, वहीं एक लड़की की आवाज़ का इस्तेमाल करके उसकी माँ से पैसे लेने का प्रयास किया गया।


अब आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे हुआ होगा... तो इसका एक ही उत्तर है... डीपफ़ेक तकनीक।


डीपफ़ेक एक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का हथियार है... जिसकी मदद से आप किसी की भी शक्ल या बॉडी का इस्तेमाल कर सकते हैं वीडियो बनाने में। आप किसी भी मानव की आवाज को पकड़ करके उस इंसान के जैसी हूबहू आवाज भी बना सकते हैं।


पिछले दिनों कुछ एप्प्स भी आपने देखी होंगी... जो आपकी तस्वीर को किसी एक्टर के शरीर पर लगा सकते हैं... किसी फ़िल्म के वीडियो में आपकी शक्ल को एक्टर के धड़ पर लगाया जा सकता है। खैर वह बचकानी एप्प्स थी।


लेकिन कुछ समय से थोड़ी आधुनिक एप्प्स आने लगी हैं... जो आपको बूढा दिखा सकती हैं... कुछ में आपके पूर्वजो की तस्वीर को रीमास्टर भी किया जा सकता है... छोटे छोटे वीडियो भी बनते हैं... जिनमे आपकी स्थिर तस्वीर का इस्तेमाल कर एक गति वाली वीडियो बनाई जा सकती है... जिसमें आपके हावभाव भी बदल सकते हैं... और जो काफी हद तक वास्तविक भी लगते हैं।


यह सब AI ऍल्गोरिथम की वजह से होता है... इन एप्प्स में डाटा (तस्वीर) को एनकोड डिकोड व संसाधित करने की क्षमता होती है।


अब तो AI की सहायता से डीपफ़ेक इस सबको कई लेवल ऊपर ले जाता है। पोस्ट में दी गई एक तस्वीर को देखिये... जिसमें एक आम इंसान है, और उसके साथ ही एक तस्वीर है हॉलीवुड कलाकार टॉम क्रूज की... डीपफ़ेक का इस्तेमाल करके उस इंसान के चेहरे पर टॉम क्रूज का चेहरा डाल दिया गया है, और अब अगर वह कोई हावभाव भी देगा, तो एकदम वास्तविक टॉम क्रूज जैसा ही लगेगा।


इसमें एक आम इंसान के चेहरे के विभिन्न पॉइंट्स का विश्लेषण किया जाता है, फिर जो चेहरा बनाना है (टॉम क्रूज जैसा) उसके हिसाब से AI ऍल्गोरिथम चेहरे के किनारों को, अन्य हिस्सों को डिकोड एनकोड और संसाधित करती है, और अंततः एकदम टॉम क्रूज जैसा चेहरा बना देती है।


कुछ एप्प्स में फेस फ़िल्टर की सुविधा भी मिलती है, जिसमें आप किसी का चेहरा भी लगा सकते हैं... ऐसा कुछ कॉमेडियन या सोशल मीडिया हस्तियाँ इसका इस्तेमाल करते हैं... लेकिन उसमे पता लग जाता है कि चेहरा नकली है।


लेकिन डीपफ़ेक से आप हूबहू किसी का भी चेहरा बना सकते हैं... और इसमें काम आती है डीप लर्निंग।


यही काम आप किसी के वॉइस सैम्पल्स का उपयोग करके भी कर सकते हैं। मान लीजिये आपने किसी से फ़ोन पर बात की, उसने आपकी बात रिकॉर्ड कर ली... अब वह उस वॉइस सैम्पल को किसी डीपफ़ेक वॉइस जेनेरेटर एप्प में डाल कर आपकी वॉइस का क्लोन बना सकते हैं।

आपकी वॉइस के उतार चढ़ाव, आपके बोलने के तरीके, स्वरमान आदि को AI ऍल्गोरिथम की मदद से सिख के, उसकी क्लोनिंग की जा सकती है।

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जो पहली घटना आपको बताई थी... उसमे अपराधी ने शिकार के दोस्त की तस्वीर या वीडियो का इस्तेमाल करके (जो सोशल मीडिया पर मिल ही जाती हैं... सब ड़ालते ही हैं) अपने चेहरे पर उसका चेहरा डाल दिया... फिर एक वीडियो कॉल मिलाई... बातें की और यह बताया कि वह किसी समस्या में है।


डीपफ़ेक की सहायता से आप किसी से लाइव वीडियो कॉल पर भी बात कर सकते हैं... और सामने वाला आपको हूबहू अपने दोस्त जैसा ही लगेगा।


दूसरी घटना में लड़की की आवाज के सैम्पल्स लिए गए होंगे... सोशल मीडिया से, या फ़ोन रिकॉर्डिंग से, या ऐसे ही कहीं बोलते हुए कैद कर लिए होंगे... और फिर उस आवाज़ के सैम्पल्स को डीपफ़ेक वॉइस जेनेरेटर्स में डाला गया होगा... और फिर उस लड़की की आवाज में चीखने चिल्लाने और मदद माँगने जैसे शब्द बना लिए गए होंगे।


और जब धमकी देने वाले ने कॉल किया होगा, तो उस लड़की की आवाज की रिकॉर्डिंग पार्श्व में चल रही होगी... ताकि उसकी माँ को लगे कि उसकी बेटी वहीं कॉलर के पास ही है, और मदद के लिए चिल्ला रही है... रो रही है।


पहली घटना में तो धोखा हो भी गया, क्यूंकि 5 करोड़ रूपए ट्रांसफर कर दिए गए थे... दूसरी घटना में महिला की दोस्त ने सीधा स्कीइंग करने गई टीम को कॉल करके समझदारी का काम किया, और एक धोखा होने से बचा लिया।


अब समस्या यह है कि जैसे जैसे AI और मशीन लर्निंग उन्नत होती जायेगी, इस तरह की और समस्याएं बढ़ती जाएंगी। कुछ समय पहले तक डीपफ़ेक वीडियोज को पहचानना आसान हुआ करता था।


1. उसमे इंसान की पलकें कम झपकती थी... या असमान पैटर्न हुआ करता था।

2. उसमे चेहरे के किनारे भी असमान या धुंधले हुआ करते थे।


लेकिन अब एप्प डेवेलपर्स ने इन कमियों को भी सुधार दिया है... वैसे भी AI तो हमेशा सीखता ही रहता है... डाटा पैटर्न्स को समझता रहता है... अब एप्प्स में पलकें झपकना भी प्राकृतिक की तरह हो गया है... वहीं किनारे भी अब पहले से बेहतर हो गए हैं... आगे यह और भी परफेक्ट सिस्टम हो जायेगा।


डीपफ़ेक तकनीक का बहुत इस्तेमाल होना शुरू हो गया है, कई देशों में AI टीवी न्यूज प्रस्तुतकर्ता भी शुरू हो गए हैं... जो हूबहू इंसान जैसे लगते हैं, और ख़बर पढते हैं। पिछले ही दिनों इंडिया टुडे ने भी एक AI न्यूज रीडर प्रारम्भ किया था।


लेकिन इस तकनीक के नुकसान भी हैं... दो तो ऊपर ही बताये हैं... इसके अलावा फेक न्यूज फैलाने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।


डीपफ़ेक की सहायता से चुनावी प्रचार भी प्रभावित किये जा सकते हैं। सोचिये क्या प्रभाव होगा वोटर्स पर अगर उनके नेता का असभ्य वीडियो आ जाए... जो डीपफ़ेक से बना हो... लेकिन एकदम असली हो?


पुतिन के कई फेक वीडिओज़ बनाये जा चुके हैं... ऐसे ही किसी बड़े राजनेता के बनाये जा सकते हैं... जो लोगों को भड़काने या दुष्प्रचार करने के काम भी कर सकते हैं... अब आप सोच लीजिये इसका क्या क्या नुकसान हो सकता है।


ऊपर बताई घटनाओं से कैसे बचें?


पोस्ट में बताई 2 घटनाओं से आप अपने आपको बचा सकते हैं। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि अगर आपको अनजाने नम्बर या Id से वीडियो कॉल आये, तो उस पर विश्वास ना करें।


किसी को पैसा ट्रांसफर करने से पहले उससे फोन पर बात करे लें... अगर गहरा दोस्त है तो उसके परिवार में से किसी से बात कर के स्थिति की पुष्टि करें।


आप कहीं छुट्टी पर जा रहे हैं... या आपके बच्चे कहीं जा रहे हैं.. तो उस सोशल मीडिया पर ना लिखें। दूसरी घटना में यह बात अपराधी को पता थी... और उसी का लाभ उठाने का प्रयास किया गया।


आपको हाइकिंग, स्कीइंग, ट्रैकिंग की तस्वीर डालनी हैं... वापस लौट कर डाल लें... क्या पता आप ऐसे इलाके में हों जहां आपसे संपर्क ना हो पाए... और कोई अपराधी इस स्थिति का लाभ उठा कर आपके घर वालों से पैसा वसूल ले... क्यूंकि आप से तो संपर्क नहीं हो पायेगा ना... ऐसे में घर वालों को लग सकता है कि आपका अपहरण हो गया हो।


अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात... तकनीक कितनी ही आधुनिक हो जाए... वह मानव के मूलभूत स्वभाव और स्थिति जागरूकता का मुकाबला नहीं कर पाएगी। कोई भी धोखा तभी होता है, जब आप अपने मूल स्वभाव से हट कर निर्णय लेते हैं।


आपको पता है कि शॉर्टकट से पैसा नहीं मिलता... लेकिन फिर भी लोग लालच में आ कर लाखों झोंक देते हैं... और कोई उस पैसे को लेकर चंपत हो जाता है... अपनी बुनियादी प्रवृत्ति को बचाये रखें... तभी तकनीकों के दुष्प्रभावो से बच पाएंगे।

नौ वर्ष, नौ योजनाएँ जिसने भारत की छवि बदली।




नौ वर्ष, नौ योजनाएँ जिसने भारत की छवि बदली।


मुझे भाजपा की एक योजना जो सबसे वृहद प्रभाव छोड़ने वाली लगी वह है ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’। हाँ, इसके पीछे आधार और जनधन खाते हैं, जिसके कारण यह संभव हुआ है।


दूसरी योजना ‘भीम’ और यूपीआई वाली है। मैं चीन गया था तो आश्चर्यचकित था कि कैसे एक एप्प ‘वीचैट’ से वो लोग सार्वजनिक सायकिल लेने से ले कर, ठेले से नूडल्स, मॉल से ले कर एप्प में ही एक-दूसरे को पैसे भेज देते थे। साल भर बाद भारत में इसका प्रसार जब देखा, तो वह चीन से उत्कृष्ट इम्प्लीमेंटेशन के साथ दिखा।


ग्रामीण लोगों के लिए पेयजल, शौचालय, आवास, एलइडी, सिलिंडर, सड़क आदि की गुँथी हुई योजनाओं ने ग्रामीण जीवन को कई सीढ़ी एलिवेट किया है। शहरी जीवन जीने वाले इन सुविधाओं की महत्ता समझ ही नहीं सकते।


चौथी योजना, जो भारतीय औद्योगिक क्षेत्र से ले कर सामान्य मानव के जीवन को सकारात्मक रूप में प्रभावित करता दिखा वह है ‘विद्युतीकरण योजना’। दिन में दो घंटे की बिजली का दौर हमने देखा है, लैम्प के शीशे की कालिख, संध्या लगाने के बाद दवाई की शीशियों में कैरोसीन तेल और ढक्कन में कपड़े की बत्ती वाले दीये/ढिबरी में हमने पढ़ाई की है।

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पाँचवी योजना है ढाँचागत विकास जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए आधारभूत आवश्यकता है। यह हर भाजपा सरकार की प्राथमिकता रहती है। गडकरी जी की सोच और उसका धरातलीकरण न केवल हमारी यात्रा के समय को कई घंटों से कम कर रहा है, बल्कि मालवाहक गाड़ियों के लम्बे जाम के कारण वस्तुओं की मूल्य वृद्धि जैसी अनियमितताओं में भी कमी आई है।


छठी योजना जिसने सामान्य जनजीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव छोड़ा है वह है मेडिकल एवम् तकनीकी कॉलेजों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि। हालाँकि, शिक्षा और शोध में और भी बजट देने की आवश्यकता है पर, आधार यदि सबल हो, तो बाद में निवेश किया जा सकता है।


सातवीं बात जो मुझे राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से इस सरकार की उपलब्धि लगती है वह है रेड कॉरिडोर को सीमित करना, नक्सिलयों की नकेल कसना और आतंकी हमलों को एक सीमा तक नगण्य कर देना। यदि कोई आक्रमण करता है, तो उसका यथासंभव उत्तर देना जो आनुपातिक न हो।


आठवीं उपलब्धि है संचार क्रांति और सूचना का लोकतांत्रीकरण। डेटा की पहुँच में विस्तार और मूल्य विश्व में न्यूनतम, इस राष्ट्र की एक बड़ी जनसंख्या को वास्तव में सोचने और बोलने वाली, जागरुक जनसंख्या में बदल चुका है। सरकार ने भी अपने सारे मंत्रालयों, मंत्रियों, जिला स्तर तक के विभागों को सोशल मीडिया से जोड़ा जो (लगभग) त्वरित कार्रवाई करते हैं। इससे निजी कम्पनियों पर भी उत्कृष्ट सेवा का दवाब बना है।


नवीं बात है रेलवे का आधुनिकीकरण और हवाई यात्रा का विस्तार। भविष्य और वर्तमान की खाई को पाटतीं ये दोनों ही विकास की सीढियाँ हमारी वैयक्तिक आर्थिक क्षमता को भारत की राष्ट्रीय आर्थिक क्षमता के समानांतर खड़ी करती हैं।


सरकार की कई नीतियों का प्रभाव आने वाले समय में अधिक दिखेगा। कमियाँ भी कम नहीं हैं, पर उनका प्रभाव सकारात्मक नीतियों के आगे कम हो जाता है।

Friday, May 19, 2023

बड़ी खबर: RBI का बहुत बड़ा फैसला, दो हजार के नोट…..

 


बड़ी खबर: RBI का बहुत बड़ा फैसला, दो हजार के नोट का सर्कुलेशन किया बंद


इस वक्त की बड़ी खबर दो हजार रुपए के नोट से जुड़ी हुई सामने आ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक ने दो हजार के नोट को वापस लेने का फैसला लिया है। फिलहाल बाजार में मौजूद दो हजार के नोट वैध रहेंगे। 30 सितंबर तक दो हजार के नोट वापस किए जा सकेंगे। आरबीआई अब दो हजार के नोट नहीं छापेगी। 


दरअसल, आरबीआई ने दो हजार के नोट को लेकर बड़ा फैसला लिया है। देश में दो हजार के नोट लीगल तो रहेंगे लेकिन उसे सर्कुलेशन से बाहर कर दिया गया है। आरबीआई ने सभी बैंकों को निर्देश जारी किया है कि वे दो हजार के नोट जारी करना तत्काल रोक दें। क्लीन नोट पॉलिसी के तहत यह फैसला लिया गया है। फिलहाल बारार में मौजूद दो हजार के नोट लीगल रहेंगे, लोग 30 सितंबर तक उन्हें बैंकों को वापस कर सकते हैं।


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आरबीआई ने कहा है कि 2018-19 में ही दो हजार रुपये के नोट को छापना बंद कर दिया गया था। 23 मई से एक बार में 20 हजार रुपये तक के ही 2 हजार रुपये के नोट बदल सकेंगे। इसके लिए सभी बैंकों में स्पेशल विंडो खोले जाएंगे इसके अलावा नोट बदलने और जमा करने के लिए आरबीआई 19 शाखा खोलेगी। बता दें कि केंद्र सरकार ने काला धन और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए 8 नवंबर 2016 की आधी रात से 500 और 1000 के नोट को बंद करते हुए 2000 रुपए के नोट लाई थी।




Tuesday, May 16, 2023

गुरुकुल कैसे खत्म हो गये ?




हमारे सनातन संस्कृति परम्परा के गुरुकुल मे क्या क्या पढ़ाई होती थी! आर्यावर्त के गुरुकुल के बाद ऋषिकुल में क्या पढ़ाई होती थी ये जान लेना आवश्यक है। इस शिक्षा को लेकर अपने विचारों में परिवर्तन लायें और प्रचलित भ्रांतियां दूर करें!


01 अग्नि विद्या (Metallurgy)

02 वायु विद्या (Flight)

03 जल विद्या (Navigation)

04 अंतरिक्ष विद्या (Space Science)

05 पृथ्वी विद्या (Environment)

06 सूर्य विद्या (Solar Study)

07 चन्द्र व लोक विद्या (Lunar Study)

08 मेघ विद्या (Weather Forecast)

09 पदार्थ विद्युत विद्या (Battery)

10 सौर ऊर्जा विद्या (Solar Energy)

11 दिन रात्रि विद्या

12 सृष्टि विद्या (Space Research)

13 खगोल विद्या (Astronomy)

14 भूगोल विद्या (Geography)

15 काल विद्या (Time)

16 भूगर्भ विद्या (Geology Mining)

17 रत्न व धातु विद्या (Gems & Metals)

18 आकर्षण विद्या (Gravity)

19 प्रकाश विद्या (Solar Energy)

20 तार विद्या (Communication)

21 विमान विद्या (Plane)

22 जलयान विद्या (Water Vessels)

23 अग्नेय अस्त्र विद्या (Arms & Ammunition)

24 जीव जंतु विज्ञान विद्या (Zoology Botany)

25 यज्ञ विद्या (Material Sic)


ये तो बात हुई वैज्ञानिक विद्याओं की। अब बात करते हैं व्यावसायिक और तकनीकी विद्या की!


26 वाणिज्य (Commerce)

27 कृषि (Agriculture)

28 पशुपालन (Animal Husbandry)

29 पक्षिपलन (Bird Keeping)

30 पशु प्रशिक्षण (Animal Training)

31 यान यन्त्रकार (Mechanics)

32 रथकार (Vehicle Designing)

33 रत्नकार (Gems)

34 सुवर्णकार (Jewellery Designing)

35 वस्त्रकार (Textile)

36 कुम्भकार (Pottery)

37 लोहकार (Metallurgy)

38 तक्षक

39 रंगसाज (Dying)

40 खटवाकर

41 रज्जुकर (Logistics)

42 वास्तुकार (Architect)

43 पाकविद्या (Cooking)

44 सारथ्य (Driving)

45 नदी प्रबन्धक (Water Management)

46 सुचिकार (Data Entry)

47 गोशाला प्रबन्धक (Animal Husbandry)

48 उद्यान पाल (Horticulture)

49 वन पाल (Horticulture)

50 नापित (Paramedical)


यह सब विद्या गुरुकुल में सिखाई जाती थी, पर समय के साथ गुरुकुल लुप्त हुए तो यह विद्या भी लुप्त होती गयी! आज मैकाले पद्धति से हमारे देश के युवाओं का भविष्य नष्ट हो रहा तब ऐसे समय में गुरुकुल के पुनः उद्धार की आवश्यकता है।


भारतवर्ष में गुरुकुल कैसे खत्म हो गये? कॉन्वेंट स्कूलों ने किया बर्बाद। 1858 में इंडियन एजुकेशन एक्ट बनाया गया। इसकी ड्राफ्टिंग ‘लोर्ड मैकाले’ ने की थी। उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी। अंग्रेजों का एक अधिकारी था जी.डब्ल्यू. लूथर और दूसरा था थॉमस मुनरो! दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग अलग समय सर्वे किया था। लूथर, जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा है कि यहाँ 97% साक्षरता है और मुनरो, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100% साक्षरता है।

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मैकाले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो इसकी “देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था” को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह “अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था” लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे।


मैकाले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है, “कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी।” इस लिए उसने सबसे पहले गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया। जब गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज की तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी। फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया और इस देश के गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया। उनमें आग लगा दी, उसमें पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने मारा पीटा, जेल में डाला।


1850 तक इस देश में ’7 लाख 32 हजार’ गुरुकुल हुआ करते थे और उस समय इस देश में गाँव थे ’7 लाख 50 हजार’। मतलब हर गाँव में औसतन एक गुरुकुल और ये जो गुरुकुल होते थे वो सब के सब आज की भाषा में ‘उच्‍चतर शिक्षा संस्थान’ हुआ करते थे। उन सबमें 18 विषय पढ़ाये जाते थे और ये गुरुकुल समाज के लोग मिल के चलाते थे न कि राजा, महाराजा।


गुरुकुलों में शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी। इस तरह से सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और फिर अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया और कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया। उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था। इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी, ये तीनों गुलामी ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी देश में हैं!


मैकाले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमें वो लिखता है कि: “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा। इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।” उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है। अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा। हम तो खुद में हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आ रही है, दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा।


लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी भाषा सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा हैॽ शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी। समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी।


संयुक्तराष्टसंघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है। जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकोले की रणनीति थी! जिसमें लगभग वो विजय पा चुके क्योंकि आज का युवा भारत को कम यूरोप को ज्यादा जनता है। भारतीय संस्कृति को ढकोसला समझता है लेकिन पाश्चात्य देशों की नकल करता है। सनातन धर्म की प्रमुखता और विशेषता को न जानते हुए भी वामपंथियों का समर्थन करता है।


सभी बन्धुओं से एक चुभता सवाल हम सभी को धर्म की जानकारी होनी चाहिये। क्योंकि धर्म ही हमें राष्ट्र धर्म सिखाता है, धर्म ही हमे सामाजिकता सिखाता है, धर्म ही हमे माता पिता,  गुरु और राष्ट्र के प्रति प्राण न्योछावर करने की प्रेरणा देता है। सनातन परंपरा एक आध्यात्मिक विज्ञान है, जिस विज्ञान को हम सभी आज जानते हैं उससे बहुत ही समृद्ध विज्ञान ही अध्यात्म है.

Monday, May 15, 2023

ब्रह्मोस !

 




ब्रह्मोस नेक्स्ट जेनरेशन ❗
ब्रह्मोस एक्सटेंडेड रेंज,❗
ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल फॉर फ्रीगेट्स❗
ब्रह्मोस एंटी शिप मिसाइल ❗
(Ship-launched Surface-launched Submarine-launched Air-launched BrahMos-II BrahMos-NG BrahMos-ER)
अगर भारत अपनी ब्रह्मोस की अलग-अलग रेंज की मिलाजुला कर सिर्फ 100 मिसाइल भी ताइवान को दे दे तो चीन ताइवान की तरफ मुंह करके लड़ाई करने की तो छोड़ो मूतने की भी हिम्मत नहीं करेगा. क्योंकि यह सौ मिसाइलस चीन की 80 परसेंट से ज्यादा जनता को पूर्णतया तबाह करने की क्षमता रखती हैं।
पर ताइवान ना जाने क्या सोच रहा है. लगता है यह भी अमेरिका के चक्कर में यूक्रेन की तरह पूरा बर्बाद हो कर ही मानेगा. अमेरिका की तो ताइवान के 548 बिलियन डॉलर के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व पर नजर है इससे पहले अमेरिका भारत के 600 बिलियन डॉलर के रिजर्व के ऊपर नजर गड़ाए बैठा था जो मोदी की हिम्मत और चीन के युद्ध से डर के चलते फेल हो गया.
अब देखो अमेरिका के लिए बलि का बकरा कौन सा देश बनता है❓ ताइवान, जापान या फिर हिंदुस्तान❗



विचारों की उत्पत्ति

मस्तिष्क, मन, चेतना और ब्रह्मांड के बीच एक दार्शनिक यात्रा प्रस्तावना : एक सरल-सा प्रश्न मनुष्य के भीतर विचार आता है। कभी अचानक।...