Tuesday, December 14, 2021

टैक्स नहीं कटता फिर भी इनकम टैक्स रिटर्न क्यों भरना चाहिए?





टैक्स नहीं कटता फिर भी इनकम टैक्स रिटर्न क्यों भरना चाहिए ?


इनकम टैक्स रिटर्न भरने की भागमभाग शुरू हो चुकी है. डेडलाइन 31जुलाई है. आप सुनते आ रहे हैं कि फाइलिंग से चूके तो 10 हजार रुपये तक जुर्माना लग सकता है, लेकिन लाखों लोग ऐसे भी हैं, जो हर साल इस कन्फ्यूजन में घिरे रहते हैं कि उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करनी चाहिए या नहीं. इनमें अधिकांश वे नौकरीपेशा लोग भी हैं, जिनकी सालाना सैलरी तो ढाई लाख रुपये से ज्यादा है, लेकिन कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती, न ही कोई TDS कटता है. बहुत से लोग थोड़ा-बहुत टैक्स कटने के बाद इस डर से रिटर्न नहीं भरते कि कहीं किसी पचड़े में न फंस जाएं.

इस तरह की आपकी कई उलझनों को तो हम यहां सुलझाएंगे ही. साथ ही रिटर्न भरने के कुछ ऐसे फायदे भी बताएंगे, जिनके बिना सरकारी जुर्माना तो छोड़िए, आपको अपने लेवल पर भी कहीं ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है. वैसे आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि कुछ मामलों में ढाई लाख रुपये से कम इनकम पर भी रिटर्न भरना जरूरी होता है.




क्या कहता है आयकर कानून ?
वित्तवर्ष 2022-23 में अगर आपकी इनकम ढाई लाख रुपये से ज्यादा रही है, तो आपके लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरना अनिवार्य है. 60 साल से ऊपर और 80 साल से कम उम्र के लोगों के लिए छूट की यह आय-सीमा 3 लाख रुपये है. 80 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को 5 लाख रुपये तक सालाना इनकम पर रिटर्न भरने से छूट मिली हुई. लेकिन तीनों ही कैटेगरी में यह छूट कुछ शर्तों के साथ है.

2.5 लाख से कम आय पर भी रिटर्न क्यों ?
अगर आपकी सालाना इनकम ढाई लाख से कम है. लेकिन देश से बाहर कहीं भी कोई संपत्ति या निवेश है, तो आपको IT रिटर्न भरना ही होगा. भारत के बाहर किसी बैंक अकाउंट में अगर आप सिग्नेटरी हैं, यानी खाता आपका है या आपकी ओर से खुलवाया गया है तब भी.

अगर किसी बैंक के करंट अकाउंट में आपके नाम 1 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम जमा हुई है, तब भी रिटर्न भरना होगा. भले ही उससे कोई ब्याज नहीं आता या उस वित्त वर्ष में आपको कोई इनकम नहीं हुई हो.

वित्त वर्ष में अगर आप या परिवार के किसी सदस्य की विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हुआ है तो भी आप पर रिटर्न भरने की जिम्मेदारी आती है. अगर किसी ने साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा की बिजली खर्च कर डाली हो, तब भी उसकी कम सालाना इनकम मायने नहीं रखती और उसे रिटर्न दाखिल करना होगा.

सीए Himanshu Garg कहते हैं  :- "इनकम न होते हुए भी आयकर कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं, जहां आपको हर हाल में रिटर्न भरना है. मसलन, कोई कंपनी या फर्म चाहे उसकी इनकम कितनी भी कम क्यों न हो, उसे इनकम टैक्स रिटर्न भरना ही होता है. रिटर्न भरना सिर्फ मजबूरी ही नहीं होती, यह कई बार फायदे का सौदा साबित होता है."



2.5 लाख से ज्यादा आय, लेकिन टैक्स नहीं कटता तो ?
यही कन्फ्यूजन सबसे ज्यादा लोगों को होता है. अगर आपकी सालाना इनकम ढाई लाख रुपये से ज्यादा है. लेकिन कानूनी तौर पर मिली हुई छूट जैसे, सेक्शन 80C के तहत डेढ़ लाख रुपये तक के निवेश पर मिलने वाली कटौती आदि के बाद अगर आप पर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती, तब भी आपको रिटर्न भरना चाहिए. इसके अपने फायदे हैं-

पहला, अगर उस साल आपके बैंक एफडी पर टीडीएस कटा हो तो उसका रिफंड लेने के लिए रिटर्न भरना ही एक मात्र विकल्प है. अगर आप कोई व्यवसायी, कॉन्ट्रैक्टर या स्वरोजगार वाले व्यक्ति हैं और किसी भी दफ्तर या विभाग में टीडीएस कटा बैठे हैं, तो बिना रिटर्न भरे वाजिब रिफंड नहीं ले पाएंगे.

दूसरा, अगर आप किसी बैंक से लोन लेना चाहते हैं तो उसकी एलिजिबिलिटी आपकी इनकम से ही तय होती है और बैंक हमेशा इनकम टैक्स रिटर्न को तरजीह देता है. बड़े होम लोन के मामले में तो कुछ बैंक रिटर्न को ही इनकम प्रूफ मानकर चलते हैं.

तीसरा, कई देश वीजा देने के मामले में आपसे इनकम टैक्स रिटर्न मांगते हैं और वे यह दलील नहीं स्वीकार करेंगे कि आपने रिटर्न इसलिए नहींं भरा क्योंकि आपकी टैक्स लाइबिलिटी नहीं बनती. पासपोर्ट ऑफिस और कुछ अन्य कामों में इनकम प्रूफ ही नहीं एड्रेस प्रूफ के तौर पर भी रिटर्न की कॉपी मान्य होती है.

चौथा, आपको शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में नफा-नुकसान हुआ हो तो रिटर्न मिस करने से एक तो पुरानी रिटर्न्स से चली आ रही कैपिटल गेन या लॉस की चेन टूट जाएगी. और हो सकता है कि आप कोई बड़ा रिफंड या राहत चूक जाएं. किसी भी तरह के कैपिटल गेन या लॉस का एडजस्टमेंट बिना रिटर्न भरे संभव नहीं है.

पहले भरते थे, फिर इनकम बंद हो गई, अब क्या करें ?
आप लगातार कई वर्षों से इनकम टैक्स रिटर्न भरते आ रहे थे, लेकिन किसी वर्ष नौकरी छूट जाने या आय ढाई लाख से कम हो जाने के चलते रिटर्न नहीं भर पाए, तब आप मुश्किल में पड़ सकते हैं. आपको हर हाल में रिटर्न का सिलसिला जारी रखना चाहिए, नहीं तो इनकम टैक्स विभाग की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी में आपके आने के चांसेज सबसे ज्यादा होंगे. जाहिर है आप पर कोई खास आंच नहीं आने वाली. लेकिन बेवजह परेशान तो होंगे ही. यह भी हो सकता है कि आने वाले साल आपको दूसरे स्रोतों से आय पर लाभ या नुकसान हो. तब भी आप कैपिटल गेन या लॉस को समायोजित नहीं कर पाएंगे.




टैक्स एक्सपर्ट Atul Singh कहते हैं :-

आयकर रिटर्न आपकी पहचान है. जो बहुत से कार्यों में अधिकृत दस्तावेज माना जाता है. आप लोन लेने जाएं तो बैंक भी कम से कम 3 साल के लगातार रिटर्न मांगते हैं. न सिर्फ लोन की रकम, बल्कि कई मायनों में ब्याज दरें भी आपकी आय से तय होती हैं. इसके अलावा भी कई मामलों में लगातार रिटर्न का रिकॉर्ड मेनटेन रखना जरूरी होता है.’

10 हजार का जुर्माना क्या है?
आज से तीन साल पहले तक रिटर्न में देरी या डेडलाइन चूकने पर कोई जुर्माना नहीं लगता था. लेकिन सरकार ने फाइनेंस एक्ट 2017 में संशोधन कर पेनाल्टी थोप दी. लेकिन डरिए मत. सभी लोगों पर एक सा जुर्माना नहीं लगता. अगर आपकी इनकम 5 लाख रुपये से कम है, तो रिटर्न में देरी पर आपको सिर्फ एक हजार रुपये जुर्माना देना होगा. जब रिटर्न की डेडलाइन 31 जुलाई या अगस्त हुआ करती थी, तब 31 दिसंबर तक रिटर्न भरने वालों पर 5 हजार रुपये जुर्माना तय था. 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच भरने पर 10 हजार रुपये की पेनाल्टी थी. चूंकि सरकार ने डेडलाइन में ही पांच महीने की मोहलत दे रखी है, ऐसे में पेनाल्टी भी उसी हिसाब से खिसकेगी. जानकारों का कहना है कि मार्च तक रिटर्न भरने पर 5 लाख से ऊपर इनकम वालों के लिए जुर्माने की राशि 5 हजार रुपये ही है. यही नहीं, देरी से रिटर्न के मामले में टैक्सेबल रकम पर 1% ब्याज का भी प्रावधान है.
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Saturday, November 13, 2021

Luxury

                                   Luxury




In the 60s a Car was a luxury.
In the 70s a Television was a luxury.
In the 80s a Telephone was a luxury.
In the 90s a Computer was a luxury...




Luxury is no more going on a cruise and eating food prepared by a renowned chef.

Luxury is eating fresh organic food grown in your own backyard.

Luxury is not having an elevator in your house.

Luxury is the ability to climb 3-4 stories of stairs without difficulty.

Luxury is not the ability to afford a huge refrigerator.

Luxury is the ability to eat freshly cooked food 2-3 times a day.

Luxury is not having a home theatre system and watching the Himalayan expedition.

Luxury is physically experiencing the Himalayan expedition.

Luxury is not getting treatment from the most expensive hospital in the USA.

So what is a Luxury now??

Being healthy, being happy, being in a happy marriage, having a loving family, being with loving friends, living in an unpolluted place

All these things have become rare. And these are the real *"Luxuries".




Thursday, October 7, 2021

IPO में निवेश से पहले रखें इन जरूरी बातों का ध्यान, अक्टूबर में मिलेंगे इंवेस्टमेंट के कई मौके !



IPO में निवेश से पहले रखें इन जरूरी बातों का ध्यान, अक्टूबर में मिलेंगे इंवेस्टमेंट के कई मौके!
अक्टूबर में करीब 10 कंपनियां अपना IPO लाने वाली हैं. लेकिन IPO में निवेश हर बार मुनाफे का सौदा नहीं होता, बल्कि कई बार ये निवेश घाटा भी दे सकता है, ऐसे में IPO में निवेश से पहले इन 5 बातों का ध्यान में रखना बहुत जरूरी है.

रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP के बारे जानें
कंपनी के एक-एक फंडामेंटल्स पर ध्यान दें
विशेषज्ञों की राय, एंकर निवेशकों की जानकारी लें
बीते दो साल से भारत के प्राइमरी मार्केट में IPO का बोलबाला है. साल 2021 में करीब 40 कंपनियां बाजार में अपना IPO लेकर आ चुकी हैं. वहीं लगभग 30-35 कंपनियां बचे हुए 3 महीनों में IPO लेकर आने वाली हैं, जिसमें से कई IPO तो इसी महीने आने वाले हैं.

आम तौर पर अधिकतर निवेशक IPO में पैसा लगाकर लिस्टिंग वाले दिन मोटी कमाई करके निकल जाते हैं. कई लोगों के लिए IPO बाजार जल्द डबल मुनाफा कमाने का एक आसान जरिया बन गया है. यही कारण है कि पिछले दो साल में अब तक पूरे देश में 8 करोड़ से ज्यादा लोग शेयर बाजार में निवेश से जुड़े हैं.

कई IPO की अच्छी लिस्टिंग की वजह से हर कोई IPO बाजार की ओर आकर्षित हो रहा है. लेकिन IPO में निवेश हर बार मुनाफे का सौदा नहीं होता, बल्कि कई बार इसमें किया निवेश घाटा भी दे सकता है, ऐसे में IPO में निवेश से पहले कुछ अहम बातों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है..




1. कंपनी के मैनेजमेंट और प्रमोटर्स की जानकारी

किसी भी IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी के मैनेजमेंट के बारे जरूर पढ़ लें. निवेशकों के लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि आने वाले IPO की कंपनी को कौन चला रहा है और मैनेजमेंट में कौन-कौन है. कंपनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी से ये साफ पता चलता है कि कंपनी का बिजनेस और रेवेन्यू पिछले कुछ सालों में कैसा रहा है. किसी भी कंपनी को आगे बढ़ाने में प्रमोटर्स और मैनेजमेंट का सबसे अहम रोल होता है. प्रमोटर्स की ज्यादा हिस्सेदारी हमेशा छोटे निवेशकों के लिए फायदेमंद होती है. इसलिए कंपनी किनके हाथों में है ये जानना बहुत जरूरी है.

2. रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के बारे जाने

कोई भी कंपनी जब IPO ला रही होती है या शेयर बेचकर फंड जुटाना चाहती है तो कंपनी मार्केट रेग्युलेटर सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DHRP) दाखिल करती है. सेबी को दिए DHRP से पता चलता है कि कंपनी IPO के जरिए जुटाए गए रकम का इस्तेमाल कहां करेगी. साथ ही, कंपनी में निवेश से क्या जोखिम हो सकता है. इन सभी बातों का पता DHRP के जरिए पता लगता है कि इंडस्ट्री में कंपनी की क्या पोजिशन है और कंपनी कितनी मजबूत है. किसी भी IPO में पैसा लगाने से पहले DHRP में दी गई पूरी जानकारी जरूर जाननी चाहिए.

3. IPO के जरिए जुटाए गए रकम का कहां होगा इस्तेमाल

कोई भी कंपनी IPO के जरिए रकम जुटाने से पहले ये जरूर बताती है कि वो इसका इस्तेमाल कहां करेगी. जैसे कि, कर्ज चुकाने के लिए, किसी नए बिजनेस एक्सपेंशन प्लान के लिए या फिर किसी अन्य कॉरपोरेट कार्यों के लिए. कंपनी जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किस तरह करेगी, इसकी जानकारी से निवेशकों को IPO में पैसा लगाने में और आसानी होती है. ये जरूर जाने की कंपनी क्यों पैसा जुटा रही है और क्या कंपनी प्राइवेट इक्विटी फंड आंशिक या पूर्ण रूप से निकासी कर रही है.

AUM Capital के हेड ऑफ रिसर्च राजेश अग्रवाल का मानना है, ‘किसी भी IPO में पैसा लगाने से पहले ये देखना जरूरी होता है कि कंपनी कौन से सेक्टर जुड़ी हुई है, प्रमोटर्स पेडिग्री क्या है. साथ ही, कंपनी के बिजनेस प्रॉस्पेक्ट्स को ध्यान में रखना जरूरी है. इसके साथ ही, कंपनी मुनाफे में है या नहीं यह देखना अनिवार्य है. पिछले कुछ IPOs में हमने देखा कि घाटे में होने के बावजूद IPOs ओवरसब्सक्राइब्ड हुआ और लिस्टिंग शानदार हुई. लेकिन जो निवेशक मध्यम से लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं उन्हें ऐसी स्थिति में सावधान होकर निवेश करने की आवश्यकता है.“





4. कंपनी के फंडामेंटल्स पर ध्यान दें

किसी भी IPO में निवेश से पहले उस कंपनी के बिजनेस मॉडल को समझें. कंपनी का कारोबार क्या है? साथ ही, कंपनी से जुड़े सेक्टर की स्थिति बाजार में कैसी चल रही है, कंपनी का कारोबार पिछले 5 सालों में कैसा रहा है, कंपनी के ऊपर बहुत ज्यादा कर्ज तो नहीं, कंपनी के मुनाफे, आय में कैसी ग्रोथ हुई है, उसका वैल्यूएशन कैसा है, इन सब बातों को ध्यान में रखकर ही IPO में निवेश करना चाहिए.

लर्नआरकेबी.इन के राकेश बंसल का कहना है, ‘IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी का IPO लाने का मकसद क्या है, ये किस वैल्यूएशन पर आ रहा है ये ध्यान में रखना जरूरी है. साथ ही, कभी भी ग्रे-मार्केट प्रीमियम को देखकर IPO में निवेश न करें.’

5. विशेषज्ञों की राय और एंकर निवेशकों की जानकारी

कई रिसर्च कंपनियां IPO आने से पहले उस कंपनी पर अपनी रिचर्स रिपोर्ट तैयार करती है या जानकारी देती हैं. ताकि निवेशकों के लिए IPO में पैसा लगाना आसान हो सके और वो सही IPO को चुन सकें. एंकर निवेशक कई बार म्यूचुअल फंड, निजी इक्विटी, बैंक और संस्थान के जरिए IPO में निवेश करते हैं. एंकर निवेशकों को IPO से जुड़ी कंपनियों के बारे पूरी जानकारी होती है. क्वालिटी एंकर निवेशकों की IPO में एंट्री होने से छोटे और मझोले निवेशकों का भरोसा और बढ़ जाता है. हमेशा अच्छी क्वालिटी के एंकर या निवेशकों की राय को ध्यान में रखकर IPO में निवेश करें.

6. बाजार के सेंटिमेंट्स पर ध्यान रखें

इसके अलावा बाजार का सेंटिमेंट कैसा है इसका भी ध्यान रखना चाहिए. कई बार बाजार के खराब सेंटिमेंट की वजह से कंपनी तय प्राइस बैंड से नीचे के स्तर पर लिस्ट हो जाती हैं. ऐसे में जो छोटी अवधि के निवेशक हैं उनको घाटे का सौदा होता है. पिछले साल देश की दूसरी सबसे बड़ी क्रेडिट कार्ड कंपनी एसबीआई कार्ड ने IPO लिस्ट किया था. लेकिन कोविड के वजह से बाजार में नकारात्मक माहौल बन गया और निवेशकों को लिस्टिंग लाभ नहीं मिल पाया, हालांकि लंबी अवधि के निवेशक टिके रहे क्योंकि, एसबीआई कार्ड एक मजबूत कंपनी है और उन्हें इसका फायदा भी मिला. इसलिए कई बार कंपनी मजबूत होने के बावजूद बाजार के खराब सेंटिमेंट्स की वजह से लिस्टिंग खराब लिस्ट होती है. इसका मतलब ये कतई नहीं की कंपनी खराब है. बाजार सेंटिमेंट्स पर टिका होता है इसलिए उसे ध्यान में रखना महत्वपूर्ण हो जाता है.

7. अक्टूबर में मिलेंगे निवेश के कई मौके

फिलहाल शेयर बाजार में तेजी का माहौल है और लिक्विडिटी भरपूर होने की वजह से IPO को शानदार रिस्पॉन्स मिलने की संभावना है. इस महीने नायका, नॉर्दर्न आर्क कैपिटल, स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस, फिनकेयर स्मॉल फाइनेंस बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक, एमक्योर फॉर्मास्युटिकल्स और मोबिक्विक जैसी कंपनियां IPO लॉन्च करने की तैयारी में हैं.

Friday, September 24, 2021

Income Tax Update: आधार का इस्तेमाल कर टीडीएस कटौती से बच सकते हैं, जानें ऐसे ही और उपाय



 Income Tax Update: विशेषज्ञों से जानिए ब्याज से होने वाली आय पर टीडीएस (TDS) कटौती से बचने के उपाय और नियम :


Income Tax Update : विशेषज्ञों से जानिए ब्याज से होने वाली आय पर टीडीएस (TDS) कटौती से बचने के उपाय और नियम
बैंकों में 40 हजार रुपए तक की ब्याज आय (सीनियर सिटीजन्स के लिए 50 हजार रुपए) पर टीडीएस (TDS) से छूट होती है. इससे ज्यादा ब्याज आय होने पर फार्म 15जी और 15एस भरकर बैंक को देने पर कटौती लागू नहीं होती है.यह है तो बहुत सिंपल लेकिन कई बार गलत जानकारी की वजह से आप आयकर अधिकारियों की नजर में आ सकते हैं. इसलिए, न्यूज18 ने इनकम टैक्स के विशेषज्ञों से बात कर टीडीएस से जुड़े सवालों के जवाब जानें हैं. आसान भाषा और सवाल-जवाब के जरिए हमारे विशेषज्ञ से समझिए टीडीएस की एबीसीडी.
Q क्या है टीडीएस?
A. इनकम टैक्स कानून के मुताबिक सरकार एक निश्चित सीमा से ज्यादा आय होने पर इनकम टैक्स वसूलती है. यह टैक्स संबंधित व्यक्ति को खुद जमा करना होता है. लेकिन कुछ मामलों में सरकार ने सोर्स पर ही टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी डाल दी है. जैसे, एफडी पर ब्याज आय. बैंक इस आय पर टैक्स काटकर इनकम टैक्स में जमा कर देते हैं.
Q फार्म 15 जी व 15एच क्या हैं. ?
A. आयकर कानून के तहत करदाता को कुछ खास तरह की आय (जैसे ब्याज, लाभांश, किराया, बीमा कमीशन आदि) स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के बगैर ही प्राप्त करने का अधिकार है. मान लीजिए कि आपकी ब्याज से आय 60 हजार रुपए है और अन्य स्रोतों से शून्य या एक लाख लाख रुपए आय है. यानी आपकी कुल आय इनकम टैक्स लिमिट से कम है. फिर भी, बैंक टीडीएस का नियम बताकर टैक्स काट लेंगे. लिहाजा, सरकार ने ऐसे लोग जिनकी कुल आय टैक्सेबल लिमिट से कम है, उनके लिए फार्म15 जी व 15एच की सुविधा दी है. फार्म 15जी का उपयोग 60 साल से कम उम्र वाले और हिंदू अविभाजित परिवार तथा 15एच सीनियर सिटीजन के लिए होता है. यह फार्म जमा करने के बाद बैंक टीडीएस कटौती नहीं करते हैं.

Q क्या फार्म 15जी व 15एच के लिए पैन होना जरूरी है ?

A. टीडीएस कटौती से बचने के लिए फार्म 15जी और 15एस दोनों में घोषणापत्र दाखिल करने के लिए पैन नंबर न भी हो तो अाधार से काम चलाया जा सकता है. हालांकि, फॉर्म 15जी और 15एच में हलफनामे दाखिल करते समय वैध पैन के जिक्र का ध्यान रखना चाहिए. यदि पैन अवैध हुआ तो हलफनामे को भी अवैध मान लिया जाएगा.

Q यह फार्म कब जमा करना चाहिए?
A टीडीएस काटने वाली हरेक संस्था के पास यह फार्म अलग-अलग जमा करने होते हैं. यानी जो भी आपका टीडीएस काटता है, उसके पास यह फार्म जमा करना होता है. यदि कटौती करने वाली एक ही संस्था से बार-बार भुगतान मिलते हैं (जैसे एक ही बैंक से बैंक जमा अथवा कई प्रकार की जमाओं पर तिमाही ब्याज) तो करदाता वित्त वर्ष के आरंभ में ही फॉर्म 15जी या 15एच में घोषणा दे सकता है. इसके बाद जब भी करदाता की अनुमानित कुल आय में बदलाव होता है तब उसे यह फार्म दाखिल करना होता है.
इस साल कब तक फार्म जमा होंगे?
वित्त वर्ष 2020-21 के लिए व्यक्तिगत आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की आखिरी तारीख अब 31 दिसंबर, 2021 है. जबकि, फॉर्म 15जी और 15एच की अंतिम तारीख अब 30 नवंबर, 2021 हो गई है.

Q क्या यह फार्म हर साल भरना होता है?
A. ये फॉर्म एक वित्त वर्ष के लिए ही वैध होते हैं. इसीलिए अगर आय से टीडीएस कटौती बचानी है तो हर वित्त वर्ष के आरंभ में ये फॉर्म जमा करने होंगे. ये फॉर्म साल में किसी भी समय जमा किए जा सकते हैं मगर पहली बार आय खाते में आने से पहले ही ऐसा करना सही रहता है.

Q तय वक्त में फार्म जमा नहीं हुआ तो?
A. फार्म जमा न होने की स्थिति में टैक्सपेयर से तय दर पर उसका टीडीएस काट लिया जाएगा. अगर टीडीएस कट जाए तो करदाता दो काम कर सकता है. यदि करदाता पहली तिमाही में ये फॉर्म नहीं दे पाता है तो उसे पहला मौका मिलते ही ऐसा करना चाहिए ताकि उस वित्त वर्ष के दौरान और कर कटौती नहीं हो. बाद में कर रिटर्न दाखिल करते समय वह टीडीएस रिफंड का दावा कर सकता है.

Q. क्या बीते साल की सकल आय की भी जानकारी देनी होगी?
A. हां. इसलिए, फार्म भरने के लिए जरूरी जानकारी भी हमेशा तैयार रहनी चाहिए. आप जिस वित्त वर्ष के लिए हलफनामा दाखिल कर रहे हैं, उस वित्त वर्ष के लिए अपनी कुल अनुमानित आय भी आपको बतानी होगी. इसमें यह भी बताना होगा कि आय की जिस राशि के लिए आप हलफनामा दाखिल कर रहे हैं, वह कितनी है. आपको यह भी बताना होगा कि आप इस तरह के कितने फॉर्म जमा कर रहे हैं. साथ ही पिछले वर्ष में जितनी सकल आय राशि के लिए फॉर्म जमा किए गए थे, उसकी जानकारी भी देनी होगी.

Q. किसी एक खाते में बैंक ब्याज 40 हजार रुपए से कम तब भी फार्म भरना होगा?

A. चाहे एक ही बैंक में अलग-अलग खाते हों या कई बैंकों में कई खाते हो, यदि कुल ब्याज आय 40 हजार रुपए से कम है तब फार्म जमा नहीं करने होंगे. लेकिन सभी बैंकों के खातों में कुल ब्याज आय 40 हजार रुपए से ज्यादा है तो हरेक बैंक में फार्म 15जी व 15एच देना चाहिए.

Q. हलफनामा में गलती हो गई है तो क्या करना होगा?
A. यदि आप टीडीएस बचाने के लिए गलत हलफनामा देते हैं तो आकलन अधिकारी आपकी और भी जांच कर सकता है. आपको यह भी सुनिश्चित करना है कि बैंकों की जितनी शाखाओं में आपको ब्याज आय मिलती है, उन सभी में फॉर्म जमा किए जाएं. हां, टीडीएस तभी कटेगा, जब सभी शाखाओं पर मिलने वाला ब्याज तय सीमा से अधिक हो जाएगा.


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Saturday, July 17, 2021

उत्कृष्ट जीवन की आवश्यकता

 






उत्कृष्ट जीवन की आवश्यकता 🔆


जीवन का कोई लक्ष्य न हो, कोई आदर्श-उद्देश्य न हो, तो मनुष्य की स्थिति ठीक उसी तरह होती है, जैसे बिना ड्राइवर के चलने वाली मोटर, जिसकी शक्तियों का दुरुपयोग होना और कहीं भी नष्ट-भ्रष्ट होकर अवनति के गर्त में पड़ जाना निश्चित है ।

उच्चादर्श, महान-लक्ष्य, उच्च-व्यक्तित्व, उज्ज्वल-कार्यक्रम, उच्च-व्यवहार को लक्ष्य बनाकर ही मनुष्य उत्कृष्ट आंतरिक स्थिति को प्राप्त करता है और यह स्थिति ही सांसारिक जीवन में विकास का मार्ग प्रशस्त करती है । जिसने अपने भीतरी स्तर का निर्माण करने में सफलता प्राप्त कर ली, उसके लिए बाह्य जीवन की सफलता भी सुनिश्चित है । आंतरिक स्थिति का निर्माण ही लक्ष्य-निर्धारण का मूल स्वरूप है । उसके लिए दृढ़ आस्था, अटल विश्वास, अनन्य निष्ठा का किला तैयार कर लेना ही बाह्य जीवन की सफलता का साधन बनता है । जीवन संग्राम में अंत तक वे ही व्यक्ति मोर्चे पर डटे रहते हैं, जिनका "उद्देश्य आदर्श," "लक्ष्य दृढ़," "पक्का", "अचल" और "एक" होता है । धूर्तता या प्रतिभा के बल पर कोई व्यक्ति थोड़े दिन छोटे से क्षेत्र में चमक सकता है, पर विश्व इतिहास के अनंत आकाश में चंद्र-सूर्य की तरह केवल वे ही महापुरुष चमकते रह सकते हैं, जिन्होने अपना अंतःकरण ऊँचा बनाया है । जिनका लक्ष्य, जिनकी अंत:स्थिति, जितनी ऊँची है, वस्तुतः वह उतना ही ऊँचा माना जाएगा ।





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काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब ………

काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब  मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है।  यह सभी को नहीं मालू...