Saturday, November 13, 2021

Luxury

                                   Luxury




In the 60s a Car was a luxury.
In the 70s a Television was a luxury.
In the 80s a Telephone was a luxury.
In the 90s a Computer was a luxury...




Luxury is no more going on a cruise and eating food prepared by a renowned chef.

Luxury is eating fresh organic food grown in your own backyard.

Luxury is not having an elevator in your house.

Luxury is the ability to climb 3-4 stories of stairs without difficulty.

Luxury is not the ability to afford a huge refrigerator.

Luxury is the ability to eat freshly cooked food 2-3 times a day.

Luxury is not having a home theatre system and watching the Himalayan expedition.

Luxury is physically experiencing the Himalayan expedition.

Luxury is not getting treatment from the most expensive hospital in the USA.

So what is a Luxury now??

Being healthy, being happy, being in a happy marriage, having a loving family, being with loving friends, living in an unpolluted place

All these things have become rare. And these are the real *"Luxuries".




Thursday, October 7, 2021

IPO में निवेश से पहले रखें इन जरूरी बातों का ध्यान, अक्टूबर में मिलेंगे इंवेस्टमेंट के कई मौके !



IPO में निवेश से पहले रखें इन जरूरी बातों का ध्यान, अक्टूबर में मिलेंगे इंवेस्टमेंट के कई मौके!
अक्टूबर में करीब 10 कंपनियां अपना IPO लाने वाली हैं. लेकिन IPO में निवेश हर बार मुनाफे का सौदा नहीं होता, बल्कि कई बार ये निवेश घाटा भी दे सकता है, ऐसे में IPO में निवेश से पहले इन 5 बातों का ध्यान में रखना बहुत जरूरी है.

रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP के बारे जानें
कंपनी के एक-एक फंडामेंटल्स पर ध्यान दें
विशेषज्ञों की राय, एंकर निवेशकों की जानकारी लें
बीते दो साल से भारत के प्राइमरी मार्केट में IPO का बोलबाला है. साल 2021 में करीब 40 कंपनियां बाजार में अपना IPO लेकर आ चुकी हैं. वहीं लगभग 30-35 कंपनियां बचे हुए 3 महीनों में IPO लेकर आने वाली हैं, जिसमें से कई IPO तो इसी महीने आने वाले हैं.

आम तौर पर अधिकतर निवेशक IPO में पैसा लगाकर लिस्टिंग वाले दिन मोटी कमाई करके निकल जाते हैं. कई लोगों के लिए IPO बाजार जल्द डबल मुनाफा कमाने का एक आसान जरिया बन गया है. यही कारण है कि पिछले दो साल में अब तक पूरे देश में 8 करोड़ से ज्यादा लोग शेयर बाजार में निवेश से जुड़े हैं.

कई IPO की अच्छी लिस्टिंग की वजह से हर कोई IPO बाजार की ओर आकर्षित हो रहा है. लेकिन IPO में निवेश हर बार मुनाफे का सौदा नहीं होता, बल्कि कई बार इसमें किया निवेश घाटा भी दे सकता है, ऐसे में IPO में निवेश से पहले कुछ अहम बातों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है..




1. कंपनी के मैनेजमेंट और प्रमोटर्स की जानकारी

किसी भी IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी के मैनेजमेंट के बारे जरूर पढ़ लें. निवेशकों के लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि आने वाले IPO की कंपनी को कौन चला रहा है और मैनेजमेंट में कौन-कौन है. कंपनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी से ये साफ पता चलता है कि कंपनी का बिजनेस और रेवेन्यू पिछले कुछ सालों में कैसा रहा है. किसी भी कंपनी को आगे बढ़ाने में प्रमोटर्स और मैनेजमेंट का सबसे अहम रोल होता है. प्रमोटर्स की ज्यादा हिस्सेदारी हमेशा छोटे निवेशकों के लिए फायदेमंद होती है. इसलिए कंपनी किनके हाथों में है ये जानना बहुत जरूरी है.

2. रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के बारे जाने

कोई भी कंपनी जब IPO ला रही होती है या शेयर बेचकर फंड जुटाना चाहती है तो कंपनी मार्केट रेग्युलेटर सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DHRP) दाखिल करती है. सेबी को दिए DHRP से पता चलता है कि कंपनी IPO के जरिए जुटाए गए रकम का इस्तेमाल कहां करेगी. साथ ही, कंपनी में निवेश से क्या जोखिम हो सकता है. इन सभी बातों का पता DHRP के जरिए पता लगता है कि इंडस्ट्री में कंपनी की क्या पोजिशन है और कंपनी कितनी मजबूत है. किसी भी IPO में पैसा लगाने से पहले DHRP में दी गई पूरी जानकारी जरूर जाननी चाहिए.

3. IPO के जरिए जुटाए गए रकम का कहां होगा इस्तेमाल

कोई भी कंपनी IPO के जरिए रकम जुटाने से पहले ये जरूर बताती है कि वो इसका इस्तेमाल कहां करेगी. जैसे कि, कर्ज चुकाने के लिए, किसी नए बिजनेस एक्सपेंशन प्लान के लिए या फिर किसी अन्य कॉरपोरेट कार्यों के लिए. कंपनी जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किस तरह करेगी, इसकी जानकारी से निवेशकों को IPO में पैसा लगाने में और आसानी होती है. ये जरूर जाने की कंपनी क्यों पैसा जुटा रही है और क्या कंपनी प्राइवेट इक्विटी फंड आंशिक या पूर्ण रूप से निकासी कर रही है.

AUM Capital के हेड ऑफ रिसर्च राजेश अग्रवाल का मानना है, ‘किसी भी IPO में पैसा लगाने से पहले ये देखना जरूरी होता है कि कंपनी कौन से सेक्टर जुड़ी हुई है, प्रमोटर्स पेडिग्री क्या है. साथ ही, कंपनी के बिजनेस प्रॉस्पेक्ट्स को ध्यान में रखना जरूरी है. इसके साथ ही, कंपनी मुनाफे में है या नहीं यह देखना अनिवार्य है. पिछले कुछ IPOs में हमने देखा कि घाटे में होने के बावजूद IPOs ओवरसब्सक्राइब्ड हुआ और लिस्टिंग शानदार हुई. लेकिन जो निवेशक मध्यम से लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं उन्हें ऐसी स्थिति में सावधान होकर निवेश करने की आवश्यकता है.“





4. कंपनी के फंडामेंटल्स पर ध्यान दें

किसी भी IPO में निवेश से पहले उस कंपनी के बिजनेस मॉडल को समझें. कंपनी का कारोबार क्या है? साथ ही, कंपनी से जुड़े सेक्टर की स्थिति बाजार में कैसी चल रही है, कंपनी का कारोबार पिछले 5 सालों में कैसा रहा है, कंपनी के ऊपर बहुत ज्यादा कर्ज तो नहीं, कंपनी के मुनाफे, आय में कैसी ग्रोथ हुई है, उसका वैल्यूएशन कैसा है, इन सब बातों को ध्यान में रखकर ही IPO में निवेश करना चाहिए.

लर्नआरकेबी.इन के राकेश बंसल का कहना है, ‘IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी का IPO लाने का मकसद क्या है, ये किस वैल्यूएशन पर आ रहा है ये ध्यान में रखना जरूरी है. साथ ही, कभी भी ग्रे-मार्केट प्रीमियम को देखकर IPO में निवेश न करें.’

5. विशेषज्ञों की राय और एंकर निवेशकों की जानकारी

कई रिसर्च कंपनियां IPO आने से पहले उस कंपनी पर अपनी रिचर्स रिपोर्ट तैयार करती है या जानकारी देती हैं. ताकि निवेशकों के लिए IPO में पैसा लगाना आसान हो सके और वो सही IPO को चुन सकें. एंकर निवेशक कई बार म्यूचुअल फंड, निजी इक्विटी, बैंक और संस्थान के जरिए IPO में निवेश करते हैं. एंकर निवेशकों को IPO से जुड़ी कंपनियों के बारे पूरी जानकारी होती है. क्वालिटी एंकर निवेशकों की IPO में एंट्री होने से छोटे और मझोले निवेशकों का भरोसा और बढ़ जाता है. हमेशा अच्छी क्वालिटी के एंकर या निवेशकों की राय को ध्यान में रखकर IPO में निवेश करें.

6. बाजार के सेंटिमेंट्स पर ध्यान रखें

इसके अलावा बाजार का सेंटिमेंट कैसा है इसका भी ध्यान रखना चाहिए. कई बार बाजार के खराब सेंटिमेंट की वजह से कंपनी तय प्राइस बैंड से नीचे के स्तर पर लिस्ट हो जाती हैं. ऐसे में जो छोटी अवधि के निवेशक हैं उनको घाटे का सौदा होता है. पिछले साल देश की दूसरी सबसे बड़ी क्रेडिट कार्ड कंपनी एसबीआई कार्ड ने IPO लिस्ट किया था. लेकिन कोविड के वजह से बाजार में नकारात्मक माहौल बन गया और निवेशकों को लिस्टिंग लाभ नहीं मिल पाया, हालांकि लंबी अवधि के निवेशक टिके रहे क्योंकि, एसबीआई कार्ड एक मजबूत कंपनी है और उन्हें इसका फायदा भी मिला. इसलिए कई बार कंपनी मजबूत होने के बावजूद बाजार के खराब सेंटिमेंट्स की वजह से लिस्टिंग खराब लिस्ट होती है. इसका मतलब ये कतई नहीं की कंपनी खराब है. बाजार सेंटिमेंट्स पर टिका होता है इसलिए उसे ध्यान में रखना महत्वपूर्ण हो जाता है.

7. अक्टूबर में मिलेंगे निवेश के कई मौके

फिलहाल शेयर बाजार में तेजी का माहौल है और लिक्विडिटी भरपूर होने की वजह से IPO को शानदार रिस्पॉन्स मिलने की संभावना है. इस महीने नायका, नॉर्दर्न आर्क कैपिटल, स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस, फिनकेयर स्मॉल फाइनेंस बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक, एमक्योर फॉर्मास्युटिकल्स और मोबिक्विक जैसी कंपनियां IPO लॉन्च करने की तैयारी में हैं.

Friday, September 24, 2021

Income Tax Update: आधार का इस्तेमाल कर टीडीएस कटौती से बच सकते हैं, जानें ऐसे ही और उपाय



 Income Tax Update: विशेषज्ञों से जानिए ब्याज से होने वाली आय पर टीडीएस (TDS) कटौती से बचने के उपाय और नियम :


Income Tax Update : विशेषज्ञों से जानिए ब्याज से होने वाली आय पर टीडीएस (TDS) कटौती से बचने के उपाय और नियम
बैंकों में 40 हजार रुपए तक की ब्याज आय (सीनियर सिटीजन्स के लिए 50 हजार रुपए) पर टीडीएस (TDS) से छूट होती है. इससे ज्यादा ब्याज आय होने पर फार्म 15जी और 15एस भरकर बैंक को देने पर कटौती लागू नहीं होती है.यह है तो बहुत सिंपल लेकिन कई बार गलत जानकारी की वजह से आप आयकर अधिकारियों की नजर में आ सकते हैं. इसलिए, न्यूज18 ने इनकम टैक्स के विशेषज्ञों से बात कर टीडीएस से जुड़े सवालों के जवाब जानें हैं. आसान भाषा और सवाल-जवाब के जरिए हमारे विशेषज्ञ से समझिए टीडीएस की एबीसीडी.
Q क्या है टीडीएस?
A. इनकम टैक्स कानून के मुताबिक सरकार एक निश्चित सीमा से ज्यादा आय होने पर इनकम टैक्स वसूलती है. यह टैक्स संबंधित व्यक्ति को खुद जमा करना होता है. लेकिन कुछ मामलों में सरकार ने सोर्स पर ही टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी डाल दी है. जैसे, एफडी पर ब्याज आय. बैंक इस आय पर टैक्स काटकर इनकम टैक्स में जमा कर देते हैं.
Q फार्म 15 जी व 15एच क्या हैं. ?
A. आयकर कानून के तहत करदाता को कुछ खास तरह की आय (जैसे ब्याज, लाभांश, किराया, बीमा कमीशन आदि) स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के बगैर ही प्राप्त करने का अधिकार है. मान लीजिए कि आपकी ब्याज से आय 60 हजार रुपए है और अन्य स्रोतों से शून्य या एक लाख लाख रुपए आय है. यानी आपकी कुल आय इनकम टैक्स लिमिट से कम है. फिर भी, बैंक टीडीएस का नियम बताकर टैक्स काट लेंगे. लिहाजा, सरकार ने ऐसे लोग जिनकी कुल आय टैक्सेबल लिमिट से कम है, उनके लिए फार्म15 जी व 15एच की सुविधा दी है. फार्म 15जी का उपयोग 60 साल से कम उम्र वाले और हिंदू अविभाजित परिवार तथा 15एच सीनियर सिटीजन के लिए होता है. यह फार्म जमा करने के बाद बैंक टीडीएस कटौती नहीं करते हैं.

Q क्या फार्म 15जी व 15एच के लिए पैन होना जरूरी है ?

A. टीडीएस कटौती से बचने के लिए फार्म 15जी और 15एस दोनों में घोषणापत्र दाखिल करने के लिए पैन नंबर न भी हो तो अाधार से काम चलाया जा सकता है. हालांकि, फॉर्म 15जी और 15एच में हलफनामे दाखिल करते समय वैध पैन के जिक्र का ध्यान रखना चाहिए. यदि पैन अवैध हुआ तो हलफनामे को भी अवैध मान लिया जाएगा.

Q यह फार्म कब जमा करना चाहिए?
A टीडीएस काटने वाली हरेक संस्था के पास यह फार्म अलग-अलग जमा करने होते हैं. यानी जो भी आपका टीडीएस काटता है, उसके पास यह फार्म जमा करना होता है. यदि कटौती करने वाली एक ही संस्था से बार-बार भुगतान मिलते हैं (जैसे एक ही बैंक से बैंक जमा अथवा कई प्रकार की जमाओं पर तिमाही ब्याज) तो करदाता वित्त वर्ष के आरंभ में ही फॉर्म 15जी या 15एच में घोषणा दे सकता है. इसके बाद जब भी करदाता की अनुमानित कुल आय में बदलाव होता है तब उसे यह फार्म दाखिल करना होता है.
इस साल कब तक फार्म जमा होंगे?
वित्त वर्ष 2020-21 के लिए व्यक्तिगत आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की आखिरी तारीख अब 31 दिसंबर, 2021 है. जबकि, फॉर्म 15जी और 15एच की अंतिम तारीख अब 30 नवंबर, 2021 हो गई है.

Q क्या यह फार्म हर साल भरना होता है?
A. ये फॉर्म एक वित्त वर्ष के लिए ही वैध होते हैं. इसीलिए अगर आय से टीडीएस कटौती बचानी है तो हर वित्त वर्ष के आरंभ में ये फॉर्म जमा करने होंगे. ये फॉर्म साल में किसी भी समय जमा किए जा सकते हैं मगर पहली बार आय खाते में आने से पहले ही ऐसा करना सही रहता है.

Q तय वक्त में फार्म जमा नहीं हुआ तो?
A. फार्म जमा न होने की स्थिति में टैक्सपेयर से तय दर पर उसका टीडीएस काट लिया जाएगा. अगर टीडीएस कट जाए तो करदाता दो काम कर सकता है. यदि करदाता पहली तिमाही में ये फॉर्म नहीं दे पाता है तो उसे पहला मौका मिलते ही ऐसा करना चाहिए ताकि उस वित्त वर्ष के दौरान और कर कटौती नहीं हो. बाद में कर रिटर्न दाखिल करते समय वह टीडीएस रिफंड का दावा कर सकता है.

Q. क्या बीते साल की सकल आय की भी जानकारी देनी होगी?
A. हां. इसलिए, फार्म भरने के लिए जरूरी जानकारी भी हमेशा तैयार रहनी चाहिए. आप जिस वित्त वर्ष के लिए हलफनामा दाखिल कर रहे हैं, उस वित्त वर्ष के लिए अपनी कुल अनुमानित आय भी आपको बतानी होगी. इसमें यह भी बताना होगा कि आय की जिस राशि के लिए आप हलफनामा दाखिल कर रहे हैं, वह कितनी है. आपको यह भी बताना होगा कि आप इस तरह के कितने फॉर्म जमा कर रहे हैं. साथ ही पिछले वर्ष में जितनी सकल आय राशि के लिए फॉर्म जमा किए गए थे, उसकी जानकारी भी देनी होगी.

Q. किसी एक खाते में बैंक ब्याज 40 हजार रुपए से कम तब भी फार्म भरना होगा?

A. चाहे एक ही बैंक में अलग-अलग खाते हों या कई बैंकों में कई खाते हो, यदि कुल ब्याज आय 40 हजार रुपए से कम है तब फार्म जमा नहीं करने होंगे. लेकिन सभी बैंकों के खातों में कुल ब्याज आय 40 हजार रुपए से ज्यादा है तो हरेक बैंक में फार्म 15जी व 15एच देना चाहिए.

Q. हलफनामा में गलती हो गई है तो क्या करना होगा?
A. यदि आप टीडीएस बचाने के लिए गलत हलफनामा देते हैं तो आकलन अधिकारी आपकी और भी जांच कर सकता है. आपको यह भी सुनिश्चित करना है कि बैंकों की जितनी शाखाओं में आपको ब्याज आय मिलती है, उन सभी में फॉर्म जमा किए जाएं. हां, टीडीएस तभी कटेगा, जब सभी शाखाओं पर मिलने वाला ब्याज तय सीमा से अधिक हो जाएगा.


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Saturday, July 17, 2021

उत्कृष्ट जीवन की आवश्यकता

 






उत्कृष्ट जीवन की आवश्यकता 🔆


जीवन का कोई लक्ष्य न हो, कोई आदर्श-उद्देश्य न हो, तो मनुष्य की स्थिति ठीक उसी तरह होती है, जैसे बिना ड्राइवर के चलने वाली मोटर, जिसकी शक्तियों का दुरुपयोग होना और कहीं भी नष्ट-भ्रष्ट होकर अवनति के गर्त में पड़ जाना निश्चित है ।

उच्चादर्श, महान-लक्ष्य, उच्च-व्यक्तित्व, उज्ज्वल-कार्यक्रम, उच्च-व्यवहार को लक्ष्य बनाकर ही मनुष्य उत्कृष्ट आंतरिक स्थिति को प्राप्त करता है और यह स्थिति ही सांसारिक जीवन में विकास का मार्ग प्रशस्त करती है । जिसने अपने भीतरी स्तर का निर्माण करने में सफलता प्राप्त कर ली, उसके लिए बाह्य जीवन की सफलता भी सुनिश्चित है । आंतरिक स्थिति का निर्माण ही लक्ष्य-निर्धारण का मूल स्वरूप है । उसके लिए दृढ़ आस्था, अटल विश्वास, अनन्य निष्ठा का किला तैयार कर लेना ही बाह्य जीवन की सफलता का साधन बनता है । जीवन संग्राम में अंत तक वे ही व्यक्ति मोर्चे पर डटे रहते हैं, जिनका "उद्देश्य आदर्श," "लक्ष्य दृढ़," "पक्का", "अचल" और "एक" होता है । धूर्तता या प्रतिभा के बल पर कोई व्यक्ति थोड़े दिन छोटे से क्षेत्र में चमक सकता है, पर विश्व इतिहास के अनंत आकाश में चंद्र-सूर्य की तरह केवल वे ही महापुरुष चमकते रह सकते हैं, जिन्होने अपना अंतःकरण ऊँचा बनाया है । जिनका लक्ष्य, जिनकी अंत:स्थिति, जितनी ऊँची है, वस्तुतः वह उतना ही ऊँचा माना जाएगा ।





Also read :   खुद से बात करने के 7 स्वास्थ्य लाभ  https://shrikhandgroup.blogspot.com/2021/06/7.html


Monday, July 12, 2021

1 दिन में शरीर की सारी गंदगी बाहर निकालकर बॉडी को करें फुल डिटॉक्स

 




1 दिन में शरीर की सारी गंदगी बाहर निकालकर बॉडी को करें फुल डिटॉक्स, जानें सुबह से लेकर रात तक क्या कैसे खाएं?

डिटॉक्स का मतलब होता है टॉक्सिन्स (गंदगी, अपशिष्ट पदार्थ, मल) को बाहर निकालना। हम जो कुछ भी रोज खाते हैं उसमें से पोषक तत्व तो शरीर पाचन के दौरान ही अलग कर लेता है, बाकी बची गंदगी को मल और मूत्र के रूप में शरीर से बाहर कर देता है। लेकिन कुछ तत्व ऐसे रह जाते हैं, जो शरीर में ही यहां-वहां जमा हो जाते हैं। तुरंत तो इनका पता नहीं चलता है, लेकिन लंबे समय में यही गंदे तत्व (टॉक्सिन्स) गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। इसलिए शरीर को समय-समय पर डिटॉक्स करते रहना जरूरी है। आपको हर 15 दिन में कम से कम 1 बार तो अपनी बॉडी को डिटॉक्स करना ही चाहिए।

अक्सर लोग बॉडी डिटॉक्स 3 कारणों से नहीं करते हैं- पहला यह कि बहुत सारे लोगों को बॉडी डिटॉक्स करने का महत्व और तरीका नहीं पता होता है। दूसरा यह कि जिन्हें पता होता है उन्हें लगता है कि डिटॉक्स करने में भूख बहुत लगती है और उनसे भूख बर्दाश्त नहीं है और तीसरा यह कि उन्हें लगता है बॉडी डिटॉक्स करने में कई दिन का समय लगत है, इसलिए वो इसके लिए समय नहीं निकाल सकते हैं। लेकिन आज हम आपको जो डिटॉक्स का डाइट प्लान बता रहे हैं, वो सिर्फ 1 दिन का है। यानी 24 घंटे में ही आपकी बॉडी पूरी तरह डिटॉक्स हो जाएगी और आपको भूख भी नहीं लगेगी। आइए बताते हैं इस डिटॉक्स के दौरान सुबह से लेकर रात तक आपको क्या कैसे खाना है।

सुबह उठते ही पिएं गर्म पानी और नींबू



आप सुबह जैसे ही उठें, सबसे पहला काम यह करें कि आधा लीटर पानी गुनगुना करें और इसमें 1 नींबू का रस निचोड़ कर डालें। इसके बाद इसे गुनगुना ही पी जाएं। खाली पेट पिया गया ये नींबू पानी आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेजी से बढ़ा देगा, पाचन की गति तेज कर देगा और शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करेगा। आप चाहें तो इसे रोज भी पी सकते हैं। इसे पीने के बाद फ्रेश हों, ब्रश करें और थोड़ी देर वॉक करें या एक्सरसाइज करें। इसके बाद 15 मिनच रेस्ट कर लें ताकि एक्सरसाइज से गर्म हुआ शरीर नॉर्मल हो जाए, इसके बाद नहाएं और फिर ब्रेकफास्ट करें।

ब्रेकफास्ट में लें ग्रीन स्मूदी



डिटॉक्स वाले दिन आपको ब्रेकफास्ट में ग्रीन स्मूदी पीनी है। ग्रीन स्मूदी हरी सब्जियों और पत्ते वाली सब्जियों को मिलाकर बनाई जाती है। इसलिए इस स्मूदी में फाइबर, मिनरल्स, विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं। ये स्मूदी आपको दिनभर एनर्जी से भरपूर रखेगी और आपके पेट को भरा रखेगी। अगर आप सप्ताह में 2-3 दिन इस स्मूदी का रेगुलर सेवन करते रहें तो आपकी त्वचा का ग्लो भी बढ़ जाएगा।

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स्मूदी बनाने के लिए ब्लेंडर में 1 कप पालक के पत्ते, 1 कप ब्रोकली, एक छोटा टुकड़ा अदरक, एलोवेरा जेल (ताजा पत्ती से निकला हुआ) 2 चम्मच, और भी जो हरी सब्जियां आप डालना चाहें डाल लें, इसके साथ 2 कप ग्रीन टी डालें और इन्हें ब्लेंड कर लें। इस स्मूदी को ग्लास में निकालें और 1 नींबू का रस तथा थोड़ा सा काला नमक डालें और मिक्स करके पी लें। आप डेढ़ से 2 ग्लास तक स्मूदी पी सकते हैं।

दिन के बीच में ग्रीन टी पिएं



अक्सर लोग नाश्ते और खाने के बीच में कुछ हल्के-फुल्के स्नैक्स खाते हैं या कॉफी-चाय पीते हैं। मगर आपको डिटॉक्स वाले दिन इन सबके बजाय खास तरीके से बनाई गई ग्रीन टी पीनी है। इसे बनाने के लिए एक पैन में पानी उबालें और इसमें थोड़ा सा अदरक कूटकर डाल दें। अदरक के साथ उबाल आ जाने के बाद इसे आंच से उतार लें और थोड़ा तापमान कम होने दें। इसके बाद इसे कप में छानें और ग्रीन टी बैग डाल दें। 3-4 मिनट बाद ग्रीन टी बैग निकाल लें और इसमें आधा नींबू का रस निचोड़ें, 1 चुटकी काली मिर्च पाउडर डालें और पी लें। पीने में समस्या हो तो थोड़ा सा शहद डाल कर घोल लें। ये चाय आपके शरीर में जमा म्यूकस को तोड़ेगी और बैक्टीरिया आदि के साथ टॉक्सिन्स को बाहर निकाल देगी।

लंच में सिर्फ सलाद खाएं



आपको लंच में कच्ची सब्जियों से बना सलाद खाना है, जिसमें ज्यादातर हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा, ककड़ी, टमाटर, मूली, ब्रोकली, पत्ता गोभी आदि जो कुछ भी आप मिलाना चाहें, मिलाकर खाएं। सभी सब्जियां हेल्दी और पौष्टिक होती हैं।

शाम को फल



लंच और डिनर के बीच भी अक्सर लोगों को भूख लगती है। इसलिए इस दौरान शाम को आप 1 बाउल फ्रूट्स और वेजिटेबल्स को मिक्स करके या सिर्फ फ्रूट्स खा सकते हैं। ये हेल्दी स्नैक आपको एनर्जी से भरा रखेगा और आपका मूड भी अच्छा रखेगा।

रात का खाना



रात का खाना सोने से 2 घंटे पहले जरूर खा लें। डिटॉक्स वाले दिन आप रात के खाने में उबली हुई सब्जियां (बिना फ्राई की हुई) या फिर सूप आदि ले सकते हैं। ध्यान रखें इस दौरान मीट या ऑयली चीज न खाएं।


इन बातों का रखें ध्यान

डिटॉक्स के लिए अक्सर लोग छुट्टी का दिन चुनते हैं, जबकि इसके लिए सबसे अच्छा दिन वो है जब आप बिजी होते हैं, यानी काम वाला दिन। इसका कारण यह है कि काम के दिन काम के कारण आपका ध्यान बार-बार टेस्टी फूड्स और भूख के बारे में नहीं सोचता है, जबकि छुट्टी के दिन आपको बार-बार इन चीजों की याद सताएगी इसलिए डिटॉक्स करना मुश्किल हो सकता है।

पूरे दिन पानी पीते रहें। आप चाहें तो बॉटल में पानी भरकर इसमें 1 नींबू का टुकड़ा, कुछ पुदीने की पत्तियां और खीरे के टुकड़े डाल लें और इस पानी को दिनभर पिएं।

रात में कम से कम 7 से 9 घंटे की नींद जरूर लें।

इस डाइट को फॉलो करने के बाद अगले दिन आप बिल्कुल हल्का और रिलैक्स महसूस करेंगे क्योंकि आपकी बॉडी के सभी टॉक्सिन्स बाहर निकल चुके होंगे।

विचारों की उत्पत्ति

मस्तिष्क, मन, चेतना और ब्रह्मांड के बीच एक दार्शनिक यात्रा प्रस्तावना : एक सरल-सा प्रश्न मनुष्य के भीतर विचार आता है। कभी अचानक।...